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नाइट शिफ्ट पर यूपी सरकार के नए नियम से महिलाओं में खुशी..

नाइट शिफ्ट पर यूपी सरकार के नए नियम से महिलाओं में खुशी..

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नाइट शिफ्ट पर यूपी सरकार के नए नियम से महिलाओं में खुशी..

 

देश – दुनिया: औद्योगिक एवं निजी संस्थानों में महिला कर्मचारियों को अब शाम सात बजे के बाद काम नहीं करना पड़ेगा। नाइट शिफ्ट में महिला कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने पर संस्थान के मालिकों को उनकी सुरक्षा, परिवहन एवं खाने का भी जिम्मेदारी उठानी पड़ेगी। उत्तर प्रदेश सरकार के इस नए आदेश से महिला कर्मचारियों एवं उनके परिजनों में खुशी है। वहीं, महिला सुरक्षा को लेकर जारी हुए नियमों को लेकर उद्यमियों में कुछ असंतोष है।

नोएडा शहर में छोटी-बड़ी मिलाकर 16 हजार से अधिक औद्योगिक इकाइयां हैं। इसमें चार लाख से अधिक महिलाएं काम करती हैं, जिसमें सबसे ज्यादा गारमेंट एक्सपोर्ट और कॉल सेंटर में महिलाकर्मियों का प्रतिशत काफी अधिक है। इसमें काफी संख्या में शाम सात बजे के बाद भी महिलाकर्मी कार्य करती हैं। प्रदेश सरकार द्वारा हाल में जारी आदेश से महिला कर्मचारियों ने बहुत खुशी जताई है। महिला कामगारों का कहना है कि सरकार के इस आदेश के बाद अब उन्हें शाम 6 बजे तक छुट्टी मिल जाएगी। वह समय से सुरक्षित तरीके से घर आकर परिवार और बच्चों की जिम्मेदारी बखूबी निभा सकेंगी।

कॉल सेंटरकी गौर सिटी में रहने वाली अनुष्का ने कहा कि दिल्ली की निजी कंपनी में काम करने जाती हूं। सरकार के इस फैसले से अब उसे कंपनी से समय से छुट्टी मिल जाएगी। वहीं समय से घर आकर आगे की पढ़ाई की तैयारी भी कर सकूंगी। पहले कई बार काम की वजह से आने में देर हो जाती थी।

जिला उद्योग केंद्र के उपायुक्त अनिल कुमार ने कहा कि सभी उद्यमियों को सर्कुलर जारी करके शासन के आदेश से अवगत करा दिया है। महिलाओं के हितों का ध्यान रखना पहली प्राथमिकता होगी। नियमों का पालन करना अनिवार्य है। अन्यथा कार्रवाई की जाएगी।

उमद्यमियों में असंतोष..

● एनईए के उपाध्यक्ष व मीडिया प्रभारी सेक्टर-59 में औद्योगिक इकाई के एमडी सुधीर श्रीवास्तव ने बताया कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए अच्छा कदम है। परंतु सभी नियमों का पालन छोटे व मध्यम वर्ग के उद्यमियों के लिए संभव नहीं है।

● आईआईए नोएडा के अध्यक्ष राहुल जैन का कहना है कि महिला कर्मी की सुरक्षा के लिए नाइट शिफ्ट में काम करवाने के नियम जरूरी हैं। परंतु सरकार अपनी सुरक्षा नीति और पुलिस को मजबूत करने की बजाय सारा भार उद्यमी पर ही डालना चाहती हैं। कुछ नियम जैसे नाइट शिफ्ट में मुफ्त परिवहन और भोजन एक छोटे कारखाने के लिए हरसमय संभव नहीं है। इससे महिला रोजगार के हतोत्साहन होने की संभावना है।

आदेश की सराहना..

आईआईए, इंटरनेशनल अफेयर्स कमेटी की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा कि यह सरकार का अच्छा कदम है। यह उन महिलाओं के हित को सुरक्षित करती है जो रात में काम करने में अच्छा महसूस नहीं करती हैं। यह सुरक्षा की दिशा में एक अच्छा प्रयास है।

आईटी कंपनी की कर्मचारी सलोचना सचदेवा ने कहा कि नौकरीपेशा महिलाओं के लिए अच्छा कदम है। इससे हम अधिक सुरक्षित महसूस करेंगी। शाम के समय ड्यूटी पर नहीं रोका जाएगा। इससे समय पर आकर घर और बच्चों की जिम्मेदारी निभा सकूंगी।

 नियम..

महिलाकर्मी से सुबह छह बजे से पहले और शाम सात बजे के बाद कार्य कराने के लिए बिना दवाब बनाए लिखित में अनुमति लेनी होगी।

निर्धारित समय के बाद कार्य करने पर इंकार करने पर नौकरी से नहीं हटाया जा सकता है।

शाम सात बजे के बाद महिलाकर्मी के आने व जाने की निशुल्क परिवहन की व्यवस्था करनी होगी।

भोजन, प्रक्षालन कक्ष, परिवर्तन कक्ष, पेयजल व शौचालय समेत अन्य सुविधाएं सुनिश्चित की जाए।

निर्धारित समय के बाद कार्य कराने के लिए इकाई में न्यूनतम चार महिला कर्मचारियों का जरूरी है।

इकाई में महिला कर्मियों की संख्या की जानकारी कारखाना निरीक्षक को देनी होगी।

 

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